फाइलेरिया के मरीजों को सेल्फ केयर किट के साथ मिला रोग रोकने को व्यायाम का तरीका

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जिला संवाददाता कौशल किशोर सिंह की रिपोर्ट 


– सेल्फ किट का हुआ वितरण
– आशा भी करेगीं फाइलेरिया रोगियों की खोज
मुजफ्फरपुर, 20 जनवरी |
मोतिपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मोरटालिटी मैनेजमेंट एंड डिजेबिलीटी प्रोग्राम पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण जिला वेक्टर बार्न रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार की देखरेख में किया गया। इस प्रशिक्षण में मोतीपुर के 40 एएनएम को डब्ल्यूएचओ की जोनल कोओर्डिनेटर सह प्रशिक्षक डॉ आरती के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया| चुने गये मास्टर ट्रेनर द्वारा आशा कार्यकर्ता और बची हुई एएनएम को प्रशिक्षण दिया जाएगा । प्रशिक्षण में हाथीपांव को नियंत्रण में रखने के लिए व्यायाम बताया गया। डॉ सतीश ने बताया कि फाइलेरिया जिसे हम हाथीपांव कहते हैं का एक और नाम लिम्फोडिमा भी है। इसका पूरा उपचार तो अभी मौजूद नहीं है पर उसे आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। बशर्ते कि वह आज प्रशिक्षण में बताए गये व्यायाम को अपने जीवन में उतारे और सरकार द्वारा दी जा रही दवाओं का नियमित रूप से सेवन करे।
आशा करेगीं खोज
डॉ सतीश ने कहा कि आशा अपने संबंधित क्षेत्र में फाइलेरिया के मरीजों की खोज कर उन्हें पीएचसी पर लाएगीं जिन्हें व्यायाम के तरीकों को बता कर सेल्फ केयर किट दिया जाएगा।
सेल्फ केयर किट का वितरण
प्रशिक्षण के बाद 50 से ज्यादा लिम्फोडिमा के मरीजों के बीच सेल्फ केयर किट का वितरण किया गया। किट में बास्केट, मग, तौलिया, एंटीबायोटिक साबुन तथा एक मरहम शामिल हैं । वहीं मरीजों को खुद से सफाई करने के बारे में भी बताया गया।


क्या है फाइलेरिया:
इसे हाथीपांव रोग के नाम से भी जाना जाता है। यह एक गंभीर रोग है जिसके कारण शरीर के अंगों में सूजन आ जाती है। यह क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से फैलता है| आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुँचाता है। फाइलेरिया से जुडी विकलांगता जैसे लिम्फोडिमा ( पैरों में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों में आजीविका एवं काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। मौके पर जिला वेक्टर बार्न रोग नियंत्रक पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार, मोतिपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार वीबीडी सलाहकार सुधीर कुमार, वीडीसीओ रौशन कुमार, फाइलेरिया सहायक प्रकाश कुमार सहित अन्य लोग मौजूद थे।


कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन,-
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।