भक्ति जीवन का लक्ष्य ,भक्ति मिल गई तो सब कुछ मिल गया*

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पातेपुर से रंजीत कुमार की रिपोर्ट

भक्ति जीवन का लक्ष्य ,भक्ति मिल गई तो सब कुछ मिल गया*

31दिसंबर 2020

पूरे विश्व में 30000से भी ज्यादा हजारों आनंदमार्गी करोना के कुप्रभाव के कारण अपने घर में ही बैठकर आध्यात्मिक आनंद का लाभ उठाया
वैश्विक महामारी करोना काल में सरकार के गाइडलाइन का पालन करते हुए आनंद मार्ग के हेड क्वार्टर आनंद नगर में वेब टेलीकास्ट एवं वेबीनार से पूरे विश्व के पुरोधाओ को संबोधित करते हुए आनंद मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख श्रद्धेय आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने

  • “जीवन का लक्ष्य ” विषय पर श्रद्धेय पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने कहा कि शास्त्रों में तो मोक्ष प्राप्ति के तीन मार्ग बताए गए हैं – ज्ञान ,कर्म और भक्ति। परंतु उन्होंने कहा कि बाबा श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने इसे खंडन करते हुए कहा कि *भक्ति पथ नहीं है बल्कि भक्ति लक्ष्य है जिसे हमें प्राप्त करना है साधारणत: लोग ज्ञान और कर्म के साथ भक्ति को भी पथ या मार्ग ही मानते हैं परंतु ऐसा नहीं है।
    उन्होंने कहा कि ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग के माध्यम से मनुष्य भक्ति में प्रतिष्ठित होते हैं। और बाबा कहते हैं कि भक्ति मिल गया तो सब कुछ मिल गया तब और कुछ प्राप्त करने को कुछ नहीं बच जाता। आदि गुरु शंकराचार्य के बारे में बोलते हुए कहा कि वह उद्भट ज्ञानी थे फिर भी भक्ति को श्रेष्ठ कहा है उन्होंने बताया की मोक्ष प्राप्ति के उपाय एवं में भक्ति श्रेष्ठ है भक्ति आ जाने पर मोक्ष यूं ही प्राप्त हो जाता है भक्तों बंद होने पर भक्तों की विजय होती है। भक्त और मोक्ष में द्वंद होने पर भक्त की विजय होती है मोक्ष यूं ही रह जाता है पुरोधा प्रमुख ने कहा कि परमात्मा कहते हैं की मैं भक्तों के साथ रहता हूं जहां वे मेरा गुणगान करते हैं कीर्तन करते हैं. परम पुरुष के प्रति जो प्रेम है उसे ही भक्ति कहते हैं। निर्मल मन से जब इष्ट का ध्यान किया जाता है तो भक्ति सहज उपलब्ध हो जाता है। अमित कुमार चौधरी भुक्ति  उमेश प्रसाद बिंदेश्वरी सहनी महासचिव प्रगतिशील मिथला समाज पार्टी के अलवा  वैशाली जिले के सैंकड़ो आन्दं मार्ग साधक साधिका टेलीकाास्ट एवं वेबी नगर कााार्यक्रम मे भाग लेकर आध्यात्मिक स्पंपंदन का लाभ प्राप्त कििया गया