आनेवाले वंशजों के अधिकार का हनन ना करें

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रमेश प्रसाद सिंह, जिला ब्यूरो वैशाली|

वर्तमान परिस्थितियों में भी पूर्वजों के दी हुई धरोहर के रूप दी गई विचार धारा से विचलित होते जा रहे हैं|इस पर किसी को विचार विमर्श करने के लिए समय ही नहीं मिलता है|एक बात कभी भी नही भुलना चाहिए कि पूर्वजों की कहावतें किसी न किसी रुप चरितार्थ होता आया है| हमलोग इस बात से इन्कार नहीं कर सकते हैं| ऐसा नहीं कि फैशन की दौड़ में पश्चिमी संस्कृति के परिवेश में ढ़लते चले जाय| वक्त है सोचने समझने का| कुछ चीजें ऐसी है जो पूर्वजों की दी हुई ज्ञान धरोहर है|हमलोगों ने कभी सोचा है कि पूर्वजों के द्वारा बनायी गयी घर  किन किन सामाग्री का उपयोग करते हुए घर बनाते थे| उसका आकलन वर्तमान परिस्थितियों के अर्थ युग में आने के बाद सब कुछ भुल गये हैं|

हमलोगों ने कभी भी नहीं सोचा है कि पूर्वजों की दी हुई घर आने वाले वंशजों को किसी न किसी रुप में देते हैं| हम सभी उस धरोहर को अतित के रूप में छोड़ते जा रहे हैं| जैसे वर्तमान परिस्थितियों में हम सभी घरों का बना रहे हैं| उस घर में अपने आप तक सीमित होकर रह गए हैं| अर्थ युग में हमलोगों को उन बिन्दुओं पर विचार विमर्श करने के लिए वक्त नही है|

पूर्वजों द्वारा बनाई गई घरों में बहुत सारी खुबिया छिपा हुआ था| घरों के छतों की उंचाई इतनी होती थी कि जाड़ा गर्मी समेत अन्य मौसम में भी आनंदमय होता था| छत की बनावट सुर्खियों, तार की कड़ी समेत तरीके  से बनाया जाता था|   पर वर्तमान में जो भी घरों को बनाया जा रहा है| सभी लोग आने वाले वंशजों के अधिकार का हनन करते जा रहे हैं| पूर्वजों के द्वारा बनाई हुई एक घर की ईट से अभी चार घर आवश्यक बना रहे हैं| पर कभी आप सबों में सोचने समझने की क्षमता नहीं है कि वर्तमान में घरों का निर्माण कर रहे हैं|क्या आने वाले वंशजों के लिए कुछ दे रहे हैं नहीं| आप अपने घरों की दीवार  की मोटाई पंद्रह से दस से पांच से तीन ईंच  ईट का प्रयोग करते जा रहे हैं| इससे साफ जाहिर होता है कि घरों के निर्माण में कम से कम हमलोगों का भी कर्तव्य बनता है कि आने वाले वंशजों के अधिकारों का हनन  ना करें|