दोहरी शोषण के शिकार हो रहे हैं किसान

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 रमेश प्रसाद सिंह की रिपोर्ट

वैशाली  प्रखंड अन्तर्गत  के व्यापार  मंडल  के अधीनस्थ  पैक्स अध्यक्ष द्वारा  धान की  अधिप्राप्ति शुरु नहीं किया गया है। जिसके कारण  कृषकगण बिचौलिया के  माधयम से  औने पौने में  धड़ल्ले बेच  रहे हैं। कृषक  दोहरी शोषण के  हो रहे हैं  शिकार।

मिलीजानकारी के अनुसार  चेहराकलां प्रखंड में  पैक्स अध्यक्ष को  1400 एम टी धान की  अधिप्राप्ति   के  निर्धारित  लक्ष्य है। इस मामले में कई  पैक्सअध्यक्ष  ने धान अधिप्राप्ति नहीं की पुष्टि करते कहा कि  सरकार की  टेढ़ी  प्रक्रिया  होने के कारण   विलंब  हो  रहा है। चालु सत्र के  किसान के भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र  होना अतिआवश्यक है। जिसके  लिए  अंचल  कार्यालय चक्कर  काटना पड़ता है। बिना  सेवा  शुल्क के  काम नहीं होता है।  सबसे बड़ी बात है कि  कृषक के पास  समय का  आभाव  होता है। कृषक की सबसे बड़ी  प्राथमिकता  समयानुसार  फसल की  देखभाल  न की भूमि स्वामित्व  प्रमाण  पत्र। किसान को आवश्यकता पड़ी तो कर्ज लेकर भी  फसल की  सूरक्षा करते हैं। सरकारी  व्यवस्था के भरोसे किसान  खेती का नहीं करते हैं।
असली किसानों का  कहना है कि  का वर्षा जब  कृषि  सुखाने। कहने का  अर्थ है कि  फसल सुख जाने पर वर्षा हुआ भी तो  किस काम  का।
खासकर  कोविड 19 को लेकर  किसानों को  आर्थिक  तंगी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा  गेहूँ,  मक्का, धान की  फसल की क्षति  से  किसानों  की आर्थिक रुप से  कमर टुट  चुकी है। इसके पीछे  मुख्य कारण है   ऐसे भी  वैशाली जिला  तम्बाकू बहुल  क्षेत्र  है। इस फसल की  तैयारी के  समय  मौसम  साथ नही  दिया। जिसके कारण  अधिकांश  किसानों के  तम्बाकू की   अच्छा  रंग  नहीं  हुआ। रह रह  लाँकडाउन में  वाहनों के  आवागमन  हमेशा  बाधित  होते  रहा। इसके  बाबजुद भी कृषक  खेतों  में  फसल  लगाना, सिंचाई, देखभाल  करना  बंद  नहीं  किया।
 कृषकों से  बिचौलिया  द्वारा  1100 से  1150 रुपये  प्रति  क्विंटल  धान की  खरीदारी  धड़ल्ले  से  कर  अन्य  प्रदेश  में  भेजे जा रहे हैं।  बिचौलिया  द्वारा  किसानों से वजन  अधिक लिया जाता है    और  समर्थन  मूल्य  कम  दिया  जाता है।जबकि  पैक्स अध्यक्ष को धान  अधिप्राप्ति के लिए निर्धारित दर 1868रुपये प्रति  क्विंटल  है
पैक्स अध्यक्षों   के  अलावा कृषक सुरेश सिंह, रविन्द्र सिंह, रमेश कुमार राय, विनय कुमार, अरुण कुमार  कुशवाहा, संजय कुमार, सतीश चन्द्र पाल,  राजेन्द्र  सिंह, वैधनाथ सिंह, कैलाश सिंह,गणपति सहनी, सुरेश पासवान, अखिलेश कुमार कुशवाहा  समेत  दर्जनों  ने कहा कि  सरकार  से  मांग किया कि कृषकों  के  किसी  फसल के  पैदावार का समर्थन मुल्य  से  कम पर पैक्स या बिचौलिया  नहीं  कर सकता है। ऐसी  व्यवस्था  सरकार द्वारा  किया जाय। तभी जाकर किसानों की आर्थिक सुधार  शुरूआत  हो सकती है।