कृषि बिल के जरिए पूरी कृषि व्यवस्था को पूंजीपतियों के हवाले कर देगी केंन्‍द्र सरकार : AIKKMS

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खेती और किसानी को पूरी तरह देसी विदेशी कारपोरेट घरानों के हवाले कर देने वाली तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आज महान क्रांतिकारी शहीद खुदीराम बोस के जन्मदिन के अवसर पर ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के आह्वान पर आयोजित अखिल भारतीय प्रतिवाद दिवस के मौके पर मुजफ्फरपुर में कंपनीबाग स्थित शहीद खुदीराम बोस स्मारक स्थल से ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन की ओर से प्रतिवाद जुलूस निकाला गया।

जो कंपनीबाग, सरैयागंज टावर, तिलक मैदान रोड, मोतीझील, सदर अस्पताल रोड होते हुए समाहरणालय पहुंचा तथा जिलाधिकारी को 8 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राज्य सचिव लालबाबू महतो ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा करोना संकट की आड़ में लाए गए इन तीन किसान विरोधी काले कानूनों के खिलाफ देशभर के किसान सड़क पर हैं। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं पश्चिमी यूपी के किसान दिल्ली में अपनी आवाज बुलंद करना चाहते हैं। परंतु भाजपा सरकार दमनकारी नीतियों को अपनाते हुए उन्हें दिल्ली प्रवेश नहीं करने दे रही है। यह केंद्र सरकार की गैर जनतांत्रिक एवं तानाशाही रवैया को ही प्रकट कर रही है। वहीं बिहार सरकार भी इन तीन काले कानूनों का समर्थन करते हुए कह रही है कि बिहार के किसानों के पास कोई समस्या नहीं है और वे खुशहाल हैं। जबकि बिहार के किसान कृषि को छोड़कर अन्य राज्यों में रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। यहां सरकारी दर पर धान की खरीद नहीं हो रही है। किसान मजबूर होकर ₹1100 प्रति क्विंटल धान निजी व्यापारियों के हाथों बेच रहे हैं। पिछले साल किसानों ने ₹800 प्रति क्विंटल की दर से मक्का बेचने पर मजबूर हुए थे जबकि दूसरे राज्यों की सरकारों ने मक्का का दाम अट्ठारह सौ रुपए प्रति क्विंटल तय किया था। वहीं बिहार के किसान जंगली जानवरों से तबाह हैं तथा यहां सिंचाई का समुचित प्रबंध नहीं है। बाढ़ सुखाड़ से प्रतिवर्ष किसानों का फसल बर्बाद हो जाता है। फसल छति मुआवजा देने के प्रावधान को जटील बनाकर अधिकांश किसाानों को इससे वंंचित किया जा रहा है। उन्होंने केन्द्र व राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार किसान आंदोलन निर्मित करने का आह्वान किया। प्रदर्शन को तारकेश्वर गिरी, यादव लाल पटेल, बिपिन ठाकुर, लालबाबू राय, कालीकांत झा, राजकुमार राम, संजीत माझी, काशीनाथ सहनी आदि ने संबोधित किया।