सम्पूर्ण शिक्षा को बाजारू माल में तब्दील कर देगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति – एआईडीएसओ

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*छात्र संगठन -एआईडीएसओ ने माननीय राज्यपाल, बिहार को ऑनलाइन ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से एनईपी 2020 को रद्द करने की मांग की गई।*

एआईडीएसओ के राज्य सचिव विजय कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा के चौतरफा निजीकरण, व्यापारीकरण, व्यवसायीकरण व साम्प्रदायिकरण को बढ़ावा देने वाली नीति है। इसे बनाने व लागू करने में सारी जनवादी प्रक्रियाओं को ताक पर रखा गया है, शिक्षाविदों, छात्र व शिक्षक संगठनों के सुझावों को पूरी तरह दरकिनार किया गया है। महामारी की भयावह परिस्थितियों का मोदी सरकार ने खूब फायदा उठाया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 देश में शिक्षा पर विनाशकारी प्रभाव डालेगी और इसे बाजारू माल में तब्दील कर देगी।

स्कूली शिक्षा की पुरानी पद्धति को बदल कर 3 से 6 साल की उम्र के बच्चों की शिक्षण प्रक्रिया उन आंगनवाड़ी केन्द्रों के हाथ में सौंपी जा रही है जो पहले से ही वेंटिलेटर पर हैं। शैक्षणिक-गैरशैक्षणिक गतिविधियों एवं विज्ञान व कला संकाय को गड्डमड्ड किया जा रहा है। यह सीखने और सिखाने की पूरी प्रक्रिया को ही बर्बाद कर देगा। इसी तरह उच्च शिक्षा में 3 साल के स्नातक डिग्री कोर्स को मल्टीपल प्रवेश व निकास सिस्टम के साथ बढ़ाकर 4 साल का करके भारतीय उच्च शिक्षा को विश्व शिक्षा बाजार के अनुरूप ढालने की योजना तैयार की गई है।

‘हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया’ (HECI) का गठन शिक्षा पर अफसरशाही के शिकंजे को और मजबूत करेगा। एनईपी में गरीब विरोधी व भेदभावपूर्ण ऑनलाइन शिक्षा को लागू करते हुए कक्षा-कक्ष शिक्षण को हतोत्साहित कर ‘डिजिटलाइजेशन’ को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जब सरकार रोजगारों में भारी कटौती कर रही हो तब NEP में वर्णित रोजगारमूलक शिक्षा सिर्फ बेरोजगार युवाओं को रोजगार के सपने बेचने और धोखा देने के अलावा कुछ नही है। इस पर भी इस शिक्षा को कक्षा 6 से ही लागू कर देना स्कूली शिक्षा एवं शिक्षा के सार तत्व को ही खत्म कर देगा। एनईपी में भाषा के गहन अध्ययन की जगह संस्कृत का महिमा मंडन कर अंग्रेजी को सिर्फ काम चलाने तक उपयोगी बताया गया है। यह शिक्षा पद्धति सिर्फ बाजार में चलने लायक उच्च ज्ञान विहीन तथाकथित पढ़े लिखे लोग ही तैयार करेगी।
एनईपी मे ‘शिक्षा के भारतीयकरण’ की बात करते हुए असल मे पिछड़े व दकियानूसी विचारों को बढ़ावा दिया गया है जो कि शिक्षा के सांप्रदायीकरण की एक खुली कोशिश है जो अंधता व उन्माद को ही बढ़ावा देगी।

छात्र संगठन -एआईडीएसओ इसके खिलाफ सभी छात्रों व शिक्षाप्रेमी जनता से अपील करता है कि हम सब एकजुट होकर एक जुझारू और व्यापक आंदोलन को संगठित कर इस शिक्षा विरोधी नीति को वापिस लेने के लिए सरकार को मजबूर करें और वैज्ञानिक,जनवादी व धर्मनिरपेक्ष शिक्षा को लागू कराने के लिए आगे आएं।