छठ पर्व की अस्ताचलगामी भगवान भास्कर की अर्घ सम्पन्न

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प्रखंडों में हिन्ददुओं का महत्वपूर्ण छठ पर्व काफी  सावधानी व सजगता के साथ की  जाती है। इस  पर्व  भूल  होने  पर भास्कर  द्वारा  चेतावनी  और  गलती  होने  पर भगवान  भास्कर  द्वारा  शीघ्र  सजा  दी जाती है  ।जैसा कि  लोगों के  बीच  अवधारणा है। चार  दिवसीय  छठ पर्व  की  शुरुआत  नहाखाय  से  शुरुआत हो  जाती हैं।  जिले   हाजीपुर सदर,लालगंज,वैशाली, पटेढ़ी  बेलसर, गोरौल, भगवानपुर, विदुपुर, दूसरी, सहदेई बुजुर्ग, महनार, राघोपुर, जंदाहा, राजापाकर, महुआ, पातेपुर, चेहराकलां आदि  प्रखंडों मे  छठव्रतियों आज  शुक्रवार को  तीसरे महापर्व छठ  अस्ताचलगामी को   केला, नीबु, नारियल, गन्ना, मुली, बास की टोकरी, फुल, पान, अर्क, पान  समेत अन्य  सामाग्री के साथ  निर्जला  रहकर अर्घ  दिया है। पुनः चौथे  दिन    उदीयमान  भगवान  भास्कर  अर्घ देती है ।  जिले के  सैकड़ों  तालाब,  पोखर, नदियों मे  काफी   श्रद्धा के साथ  छठ  व्रतियों ने  संध्या अर्घ  दिया है।   अर्घ  देने से  पूर्व   अधिक पोखर तालाब मैं डुबकी लगाकर छठ व्रत धारियों ने अस्थल गा मी भगवान भास्कर को अर्ध प्रदान किया इस विहंगम एवं मनोरम दृश्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु तालाब एवं पोखर के साथ-साथ के साथ-साथ नारायणी नदी किनारे खड़ा होकर आस्था पूर्वक भगवान भास्कर को नमन किया। लोक आस्था का महापर्व छठ व्रत के तीसरे दिन दौरा ले जाने के लिए परिजन पूरे दिन लगे रहे अपराहन बेला के दौरान छठ व्रत धारी के पीछे पीछे परिवार के सदस्य गीत गाते हुए घाट तक पहुंचे ।सदर प्रखंड क्षेत्र के शुभई स्थित काफी संख्या में व्रत धारी छठ पोखर किनारे पहुंच गए। जहाँ पर सजी हुई  घाट  पर छठ  व्रतियों द्वारा  अस्ताचलगामी भगवान  भास्कर अर्घ  दी गई। पुनः  शनिवार को  उदयमान  भगवान  भास्कर की  अर्घ प्रदान के  उपरांत  ही छठ पर्व  सम्पन्न  होता है।