लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग होकर अपने दम पर बिहार विधानसभा चुनाव में उतरने का फैसला लिया

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पटना
लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग होकर अपने दम पर बिहार विधानसभा चुनाव में उतरने का फैसला लिया है। एलजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में रविवार को यह फैसला लिया गया। हालांकि पार्टी का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से उसकी कोई कटुता नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नेतृत्व उसे मंजूर नहीं है। एलजेपी ने यह भी ऐलान कर दिया है कि बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने पर जीत हासिल करने वाले एलजेपी विधायक बीजेपी के ही साथ मिलकर प्रदेश में सरकार बनाएंगे। एलजेपी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि विधानसभा चुनाव में राज्य स्तर पर गठबंधन में शामिल जनता दल-युनाइटेड (जेडीयू) से वैचारिक मतभेद के कारण पार्टी ने गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। जेडीयू को लेकर एलजेपी की ओर से कही गई बात के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्या वजह है कि दोनों पार्टियां एक-दूसरे को पसंद नहीं करती हैं। सोमवार की सुबह लोगों के हाथ में अखबार पहुंचने के बाद बिहार के लगभग हर चाय दुकान पर यही चर्चा होती रही कि आखिर चिराग पासवान और नीतीश कुमार में क्यों है ’36 का आंकड़ा’?

Nitish-Kumar-and-Ram-Vilas-

2005 से पासवान और नीतीश में है टशन
साल 2005 के फरवरी-मार्च में बिहार में विधानसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव से ठीक पहले रामविलास पासवान ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से इस्तीफा देकर अपनी पार्टी लोकजनशक्ति बना ली थी और चुनाव में अकेले उतर गए थे। उस दौरान नीतीश कुमार और बीजेपी मिलकर लालू फैमिली की सरकार उखाड़ने की मुहिम में जुटे थे। नीतीश कुमार चाहते थे कि रामविलास पासवान उनके साथ रहें ताकि इस मुहिम को बल मिले, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। रामविलास पासवान अलग हो गए और अकेले चुनाव मैदान में उतरे।LJP के NDA से अलग चुनाव लड़ने के फैसले ने तैयार किए नए सियासी समीकरणचु

नाव रिजल्ट आने के बाद बिहार की जनता ने सत्ता की चाभी रामविलास पासवान को सौंप दी थी। उनकी पार्टी एलजेपी को 29 सीटें आई थीं। नीतीश कुमार ने एक बार फिर रामविलास पासवान से अप्रोच किया कि वह उनके साथ आकर सरकार बनाएं और चलाएं। लेकिन रामविलास पासवान अपनी जिद्द पर अड़े रहे। रामविलास पासवान राज्य में मुस्लिम मुख्यमंत्री की डिमांड पर ना नीतीश और ना लालू फैमिली को समर्थन दिया।

इसी बीच मीडिया में खबरें आईं कि रामविलास पासवान के करीब 23 विधायक टूटकर नीतीश कुमार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। हालांकि नीतीश कुमार ने साफ तौर से मीडिया में कह दिया कि वह किसी किस्म की तोड़फोड़ करके सरकार नहीं बनाएंगे। नीतीश ने भले ही रामविलास पासवान की पार्टी के विधायकों को अपने साथ नहीं लिया, लेकिन उनकी पार्टी में तोड़फोड़ की हुई कोशिश से वह काफी आहत हुए। माना जाता है कि दोनों नेताओं के बीच टशन का दौर यहीं से शुरू हो गया।

input:navbharat times