हाजी पीर अब्दुल रहमान के मजार पर चादरपोशी

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वैशाली (जिला ब्युरो)।
जिस किसी ने दिल से हाजी पीर अब्दुल रहमान के मचार बकसामा से दुआ मांगता,उसकी मन की मुराद निश्चित रूप से पुरी होती है। यही कारण है कि हरेक साल  की भांति इस साल भी वार्षिकोत्सव के अवसर पर लोगों ने हाजी पीर अब्दुल रहमान के मजार पर काफी संख्या में चादर पोशी की है।
गद्दीनशीं मो इश्तयाक ने बताया कि पीर अब्दुल रहमान ने जीवित अवस्था में भी हमेशा दीन-दुखियों की सेवा किया करता थे।उनकी दुआ लोगों को बरकत मिलता था। जिसके कारण बिहार प्रदेश के अलावा कलकत्ता, मुम्बई, दिल्ली,केरल,बंग्लौर  समेत अन्य शहरों से आकर दिल से दुआ मांगते थे।उनकी मन की मुराद पूरी हो जाती थी। उनके तेरहवीं सालगिरह के अवसर पर केवल चादर पोशी का आयोजन किया गया। वैश्विक महिमारी के कारण लोगों की भीड़ काफी कम है।
बकसामा पंचायत के मुखिया मो हाशमी ने  जानकारी देते हुए बताया कि  पीर अब्दुल रहमान द्वारा बार बार कहा करते थे कि इस पंचायत के मुखिया पद पर रहकर पंचायत की सेवा करने का मौका मिलेगा।आज उनका कथन सत्य साबित हुआ। उनके बताये रास्ते पर चल रहा हूं। तेरहवीं सालगिरह के अवसर पर चादर पोशी लोगों ने किया है।कोविड-19 वैश्विक महिमारी को लेकर कमिटी ने निर्णय लिया कि प्रत्येक साल की भांति सालाना चादर पोशी के अवसर पर उर्स मेला आयोजन नहीं किया जायेगा। जीवित अवस्था में भी पीर अब्दुल रहमान ने लोगों की सेवा में सारी जिंदगी लगा दिये  थे।। मरणोपरांत भी लोगों में आज भी उतनी आस्था विश्वास कायम है । यही कारण है कि आज भी लोगों उनसे सच्चे मन से मन्नतें मांगते हैं उसकी इच्छा निश्चित रूप से पुरी होती है। वहीं लोगों उनके मजार पर पोशी किया करते हैं। उनके मजार पर  चादर पोशी सभी के
 समुदाय लोग शामिल होते आ रहे थे।मजार पर आयोजित चादरपोशी के अवसर पर सालाना उर्स मेला सभी समुदायों के लोग सरीख होते हैं।
इस मौके पर  सज्जाद,मो रहुब,नूर मोहम्मद,मो खालिक,मो सगीर,मो मुस्तकीम,राजाअली, अब्दुल मजीद,रौनक,लाल मोहम्मद,इसुफ,साबीर, इब्राहिम,लच्छु राय, सुरेन्द्र व्यास, विकास कुमार,लखीन्द्र राय, समेत अन्य लोग उपस्थित थे।