कार्यस्थल पर स्तनपान है माताओं का अधिकार, नियोक्ता रखें सुविधाओं का ध्यान

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वैशाली जिला संवाददाता कौशल किशोर सिंह की रिपोर्ट.

– पेड मातृत्व अवकाश के नियमों का रखें ख्याल
– स्तनपान नवजातों का है संपूर्ण आहार
– पूरे विश्व में स्तनपान से प्रत्येक वर्ष बचती है 8.20 लाख बच्चों की जान
वैशाली। 6 अगस्त
किसी भी बच्चे के जीवन की शुरुआत स्तनपान से बेहतर नहीं हो सकती या यूं कहें कि इससे सर्वोत्तम कुछ भी नहीं। यह माता और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य, पोषण और भावनात्मक फायदे देता है। साथ ही यह एक स्थायी आहार प्रणाली का हिस्सा बनता है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन यह हमेशा आसान नहीं होती । खास कर उन महिलाओं के लिए जो कामकाजी हैं। अक्सर ही ऐसी महिलाएं बच्चों को पूरे समय स्तनपान नहीं करवा पाती। नतीजतन बच्चे को वह प्राकृतिक पोषण भी नहीं मिल पाता। इस संबंध में डब्ल्यूएचओ ने एक पोस्टर जारी किया है जिसमें वह नियोक्ताओं से प्रत्येक मां को स्तनपान कराने से वंचित नहीं रखने को कहता है बल्कि उसे माताओं को स्तनपान को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है।

क्या कर सकते हैं नियोक्ता

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि मां और बच्चे के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कामकाजी महिलाओं को 24 हफ्ते का मातृत्व अवकाश देना जरुरी है। यह बच्चों की मृत्यु दर में सुधार के लिए बहुत ही जरुरी है। 2016 में अध्यादेश के बाद अपने देश में 16 से 26 हफ्ते का पेड मातृत्व अवकाश दिया गया है। नियोक्ता चाहे तो वर्कप्लेस पर बच्चों को लाने की अनुमति भी दे सकती है जिससे स्तनपान सुनिश्चित हो सके। काम के शिड्युल को भी फ्लेकसिबल बनाया जा सकता है। वही माताओं को टेलिवर्किंग या वर्क फ्रॉम होम का ऑप्शन भी दे सकते हैं। माताओं को अतिरिक्त समय में काम के लिए कह सकते हैं।

स्तनपान को लेकर भ्रांतियां दूर करने की जरुरत
स्तनपान को लेकर हमारे समाज में भी ढेर सारी भ्रांतियां मौजूद हैं जिनमें जन्म के समय शहद चटाने, बीमार मां के दूध पीलाने तथा बीमार बच्चे को दूध पीलाने को लेकर भी है। इस बारे में गोरौल ब्लॉक में आशा फैसिलेटर के रुप में कार्यरत संजरी कहती हैं कि जब मैं लोगों के बीच जाती हूं तो तरह-तरह की बातें स्तनपान को लेकर सुनती हूं, पर मैं हमेशा ही उन्हें स्तनपान के फायदों के बारे में बताती हूं। कहती हूं शुरूआती समय में एक चम्मच से अधिक दूध नहीं बनता है। यह दूध गाढ़ा एवं पीला होता है। जिसे क्लोसट्रूम कहा जाता है इसके सेवन करने से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। लेकिन अभी भी लोगों में इसे लेकर भ्रांतियाँ है कुछ लोग इसे गंदा या बेकार दूध समझकर शिशु को नहीं देने की सलाह देते हैं। दूसरी तरफ़ शुरूआती समय में कम दूध बनने के कारण कुछ लोग यह भी मान लेते हैं कि माँ का दूध नहीं बन रहा है। यह मानकर बच्चे को बाहर का दूध पिलाना शुरू कर देते हैं। जबकि यह केवल सामाजिक भ्रांति है। बच्चे के लिए यही गाढ़ा पीला दूध जरुरी होता है एवं माँ का शुरूआती समय में कम दूध बनना भी एक प्राकृतिक प्रक्रिया ही है।
क्या आप जानते हैं
• 6 माह तक केवल स्तनपान नहीं करने वाले बच्चों में 6 माह तक केवल स्तनपान करने वाले बच्चों की तुलना में पहले 6 महीने में 14 गुना अधिक मृत्यु की सम्भावना होती है (लेंसेट, 2008 की रिपोर्ट के अनुसार)
• संक्रमण से होने वाले 88 प्रतिशत बाल मृत्यु दर में स्तनपान से बचाव होता है (लेंसेट, 2016 की रिपोर्ट के अनुसार)
• सम्पूर्ण स्तनपान से शिशुओं में 54 प्रतिशत डायरिया के मामलों में कमी आती है (लेंसेट, 2016 की रिपोर्ट के अनुसार)
• स्तनपान से शिशुओं में 32 प्रतिशत श्वसन संक्रमण के मामलों में कमी आती है (लेंसेट, 2016 की रिपोर्ट के अनुसार)
• शिशुओं में डायरिया के कारण अस्पताल में भर्ती होने के 72 प्रतिशत मामलों में स्तनपान बचाव करता है (लेंसेट, 2016 की रिपोर्ट के अनुसार)
• शिशुओं में श्वसन संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के 57 प्रतिशत मामलों में स्तनपान बचाव करता है (लेंसेट, 2016 की रिपोर्ट के अनुसार)
• बेहतर स्तनपान 1 साल में विश्व स्तर पर 8.20 लाख बच्चों की जान बचाता है (लेंसेट, 2016 की रिपोर्ट के अनुसार)