स्वच्छता दिलाएगी दूषित जल के रोगों से छुटकारा, हाथ धोकर ही खाएं खाना

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जिला संवाददाता कौशल किशोर सिंह की रिपोर्ट.
– बरसात के मौसम में पानी को हमेशा उबालकर पीएं
– उल्टी, दस्त जैसे लक्षण दिखते ही चिकित्सक से करें संपर्क

मुज़फ़्फ़रपुर । 4 जुलाई
अमूमन प्रत्येक वर्ष मानसून के समय में शहर की गलियां और सड़कें जलमग्न दिखती हैं। यह जलजमाव प्रत्येक वर्ष अपने साथ अनेक तरह की जलजनित बीमारियां भी लाती हैं। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ एस पी सिंह कहते हैं कि स्वास्थ्य का सीधा संबंध पानी से होता है। पीने के पानी में अगर थोड़ी सी भी असावधानी बरतनें पर हम रोगों की चपेट में आ सकते हैं। बरसात के समय में शहरों में पानी जमने की समस्या से डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, हैजा, दस्त, टायफाइड, पीलिया जैसे जानलेवा रोगों की चपेट में आ जाते हैं। यह बीमारियां हमें घेरे नहीं इसके लिए हम स्वच्छता को अपनाने के साथ हाथ धोने तथा पीने के पानी की गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा।

घर में पानी की गुणवत्ता का रखें ख्याल
उल्टी, दस्त, टायफाइड, पीलिया और हैजे जैसी बीमारियां पानी व खाद्य पदार्थो में बैक्टीरिया और वायरस से फैलती हैं। मानसून के दौरान इस रोग का सबसे ज्यादा प्रकोप देखने में आता है। इससे बचने का सबसे कारगर उपाय यही है कि बाहरी खाद्य सामग्री और दूषित पानी से दूरी बरती जाए। डॉ सिंह ने बताया पानी की गंदगी को दूर करने के लिए पानी को 20 मिनट तक उबालना चाहिए, फिर इस पानी को ठंडा कर पीना चाहिए। वहीं क्लोरीन की गोली का इस्तेमाल भी पानी को साफ करने में होता है। पीने के पानी में एक क्लोरीन की गोली को डाल दें फिर इसे आधा घंटा छोड़ दें। जब पानी साफ दिखने लगे उसके आधे घंटे बाद पानी को पीएं। साथ खाना खाने से पहले तथा सौच के बाद अच्छी तरह साबुन से हाथों की सफाई भी जरूरी है।

उल्टी, दस्त जैसे लक्षण दिखते ही चिकित्सक से करें संपर्क
डॉ एस पी सिंह ने बताया यदि किसी व्यक्ति को बार-बार उल्टी व दस्त हो रहे हों, तो हो सकता है कि इसकी वजह पिया गया प्रदूषित पानी हो। कुछ लोगों में इसके कारण अचानक से वजन कम होने की शिकायत भी देखी गई है। ऐसे रोगी के शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसे देखते हुए जरूरी है कि आप उन्हें लगातार नींबू, नमक और चीनी वाला पानी पिलाएं। ओआरएस का घोल देना उपयोगी रहता है। यदि उल्टी-दस्त रुकने का नाम न लें तो डॉक्टर के पास जाने में देर बिल्कुल न करें। साथ ही बताया बहुधा डायरिया के मरीजों में चावलों के मांड की तरह शौच होता है। कई मरीजों में उल्टी-दस्त के साथ डीहाइड्रेशन व पेटदर्द की भी शिकायत देखने में आती है। इसलिए जलजनित रोगों से अपने परिवार को सुरक्षित रखना है तो अपने घर में पानी की गुणवत्ता को सुनिश्चित करें।

रोग, जो शरीर में आते पानी के साथ
स्वच्छ तथा साफ पानी न पीने से बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है, जिसकी वजह से हैजा, टाइफाइड, पेचिश जैसी बीमारियां आसानी से किसी को भी अपना शिकार बना सकती हैं। इसके अलावा वायरल इंफेक्शन भी हो सकता है। वायरल इंफेक्शन के कारण हेपेटाइटिस ए, फ्लू, कॉलरा, टायफाइड और पीलिया जैसी खतरनाक बीमारियां होती हैं। इससे कई संक्रामक बीमारियां भी फैलती हैं। ये बीमारियां हाथ मिलाने, गले लगने, एक-दूसरे का रुमाल उपयोग करने व एक साथ खाना खाने से फैलती हैं। इनमें बुखार, पेचिश, हैजा और आइफ्लू व आंख आने जैसी बीमारियां भी प्रमुख हैं।

सेहत का रखवाला पानी

डॉ सिंह ने बताया हमारा शरीर कई तरह की जिम्मेदारियां निभाता है और पानी इस काम में शरीर की मदद करता है। इसीलिए डॉक्टर भी अकसर मशविरा देते हैं कि एक दिन में कम-से-कम 8 गिलास पानी पीना चाहिए। यदि आप शारीरिक श्रम ज्यादा करते हों तो भी आपको ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए। सही मात्रा में पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म भी सही तरीके से काम करता है। आइए जानें कि पानी स्वस्थ रहने में हमारी कैसे-कैसे मदद करता है:

प्रत्येक दिन 8-10 गिलास साफ पानी पीने से शरीर में रहने वाले जहरीले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिससे शरीर रोगमुक्त रहता है।

शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी रहने से शरीर में चुस्ती और ऊर्जा बनी रहती है। थकान का खास एहसास नहीं होता।

पानी पीने से शरीर में फाइबर की पर्याप्त मात्रा कायम रहती है जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और बीमारियां होने का खतरा कम होता है।

प्रचुर मात्रा में पानी पीने से शरीर में अनावश्यक चर्बी जमा नहीं होती। यदि आप अपने बढ़ते वजन को लेकर परेशान हैं, तो अधिक पानी पीएं।

उचित मात्रा में पानी पीने से शरीर में किसी भी प्रकार की एलर्जी होने की आशंका कम हो जाती है। साथ ही फेफड़े में संक्रमण, अस्थमा और आंत की बीमारियां आदि भी नहीं होते।

नियमित भरपूर पानी पीने से पथरी होने का खतरा भी टला रहता है।

पर्याप्त पानी पीने वाले अकसर सर्दी, जुकाम जैसे रोग भी नहीं घेरते।