मां का दूध बच्चे को देगा मजबूत आधार, 1 से 7 अगस्त तब मनेगा स्तनपान सप्ताह

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जिला संवाददाता कौशल किशोर सिंह की रिपोर्ट.

– छह माह तक के बच्चों को जरुर कराएं स्तनपान
– “स्वस्थ्य ग्रह के लिए स्तनपान का समर्थन करना है” इस वर्ष की थीम

मुजफ्फरपुर, 3 जुलाई:

जन्म के समय मां का दूध ही बच्चों का आहार होता है। बच्चे के जन्म के समय मां का गाढ़ा पीला दूध भी उनके लिए वरदान साबित होता है। जो उनके सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। डीसीएम राजकिरण ने कहा जिले की आशा द्वारा भी एक से सात अगस्त तक स्तनपान को प्रोत्साहित करने के साथ शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए मनाया जाएगा। इस बार के विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम स्वस्थ्य ग्रह के लिए स्तनपान का समर्थन करना है, जिसमें नवजातों के माता -पिता को स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए जागरुक किया जाएगा।

जिले के बारे में क्या कहता है राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे का आंकड़ा:

शिशुओं के लिए को छह माह तक केवल मां का दूध अमृत के समान होता है। इस मामले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वे-4 का आंकड़ा कहता है कि जिले के 78.9 प्रतिशत माताएं अपने बच्चे को स्तनपान कराती हैं। जबकि जन्म के एक घंटे के भीतर 36.7% बच्चे स्तनपान कर पाते हैं। वहीं 6 से 8 महीने के वैसे बच्चे जो मां के दूध के साथ ठोस और सेमी फुड लेते हैं उनका प्रतिशत 33.1 है। इन आंकड़ों को हम देखें तो हमें ज्ञात होगा कि हमें अभी लोगों में काफी जागरुकता फैलानी होगी। वहीं हमें स्तनपान के फायदों को भी लोगों को बताना होगा।

गंभीर रोगों से बचाव: माँ का दूध जहाँ शिशु को शारीरिक व मानसिक विकास प्रदान करता है वहीँ उसे डायरिया, निमोनिया और कुपोषण जैसी जानलेवा बिमारियों से बचाता भी है। जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान शुरू कराने से शिशु मृत्यु दर में 20 प्रतिशत तक की कमी लायी जा सकती है। छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11 प्रतिशत और 15 प्रतिशत कमी लायी जा सकती है। लैंसेट की 2015 की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है की अधिक समय तक स्तनपान करने वाले बच्चों की बुद्धि उन बच्चों की अपेक्षा तीन पॉइंट अधिक होती है, जिन्हें माँ का दूध थोड़े समय के लिए मिलता है। इसके अलावा स्तनपान स्तन कैंसर से होने वाली मौत को भी कम करता है।
शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी के लिए आवश्यक है:
– जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान प्रारम्भ किया जाए
– 6 माह तक केवल स्तनपान कराया जाए (ऊपर से पानी भी नहीं)
– शिशु के 6 माह पूर्ण होने के तुरंत बाद अनुपूरक आहार देना शुरू किया जाए एवं कम से कम शिशु के 2 वर्ष तक स्तनपान जारी रखा जाए

स्तनपान के विषय में आम जागरूकता है अहम : जिला सिविल सर्जन ने बताया बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए स्तनपान बहुत जरूरी होता है। इस पर सामुदायिक जागरूकता के लिए जिले में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य केन्द्रों पर स्तनपान के लिए सामुदायिक जागरूकता के लिए गतिविधियाँ चलायी जाएंगी। साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों की स्तनपान पर क्षमता वर्धन एवं स्तनपान नीति को स्थापित करने वाले चिन्हित स्वास्थ्य केन्द्रों को सम्मानित करने के साथ स्वास्थ्य केन्द्रों पर स्तनपान का सुदृढीकरण किया जाएगा।