सुपोषण पर अलख जगा रही आंगनबाड़ी सेविका सोनी, बाढ़ पूर्व गर्भवती महिलाओं की लिस्ट की तैयार

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जिला संवाददाता कौशल किशोर सिंह की रिपोर्ट.

मुजफ्फरपुर। 29 जुलाई:
कोरोना के कारण निरंतर अंतराल पर हो रहे लॉकडाउन के मद्देनजर आंगनबाड़ी केन्द्र बंद चल रहे हैं, जिससे बच्चों को इन केन्द्रों पर मिलने वाले पोषाहार को सुनिश्चित करने में सरकार की चुनौतियाँ बढ़ी है. लेकिन ऐसे मुश्किल दौर में मुस्तफापुर पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 173 की सोनी कुमारी इन चुनौतियों को आसान बनाने में पूर्ण सहयोग कर रही है. सोनी ने लॉकडाउन होने के बावजूद भी बच्चों के पोषाहार वितरण को रुकने नहीं दिया. वह जून के पहले तक घर-घर जाकर बच्चों को राशन पहुंचाती थीं ताकि उन्हें बेहतर पोषण मिल सके. जून से राशन की राशि सीधे बच्चों के अभिभावक के खातों में जाने लगी है.

लॉकडाउन में भी जरुरी कार्यक्रमों पर दिया ध्यान:
लॉकडाउन होने के कारण आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आयोजित होने वाली महत्वपूर्ण गतिविधियाँ, जैसे अन्नप्राशन एवं गोदभराई को रोका गया था. लेकिन सोनी ने लॉकडाउन में भी इन महत्वपूर्ण गतिविधियों को बाधित होने से बचाया. सोनी ने बताया लॉकडाउन में भी गृह भ्रमण कर अन्नप्राशन और बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करना वह कभी नहीं भूली। उनके पोषण क्षेत्र में 4 बच्चे अतिकुपोषित हैं. वह उनका निरंतर ध्यान रख रही है एवं वह यह प्रयास भी कर रही है कि उनके अभिभावक उन्हें पोषण पुर्नवास केंद्र भेजें. जल्द ही चिन्हित कुपोषित बच्चों को पोषण पुर्नवास केंद्र भेजा जाएगा.

बाढ़ को लेकर भी सोनी ने की पूर्व तैयारी:

सोनी ने बताया बरसात के इस महीने में प्रखंड में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे समय में गर्भवती माताओं की लाइन लिस्टिंग की जरूरत को समझते हुए उन्होंने बाढ़ से पूर्व गर्भवती माताओं की लिस्टिंग कर चुकी है. उनकी यह तरकीब असरदार भी साबित हुयी है, क्योंकि अब बाढ़ ने गाँवों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. उन्होंने बताया उन्होंने 22 गर्भवती महिलाओं की लिस्ट बनायी है। साथ ही इनके सुरक्षित प्रसव को लेकर संस्थागत प्रसव की पूर्व तैयारी भी कर ली गयी है.

कोरोना और चमकी के प्रति जागरुक किया:
सोनी कहती हैं गांव में लोगों के बीच कोरोना को लेकर कई भ्रांतिया थी। लोग हाथ धोने के महत्व को समझ नहीं रहे थें। जिसे उन्होंने प्रतिदन गृह भ्रमण कर लोगों को जागरुक किया। लोगों को सोशल डिस्टेंसिेंग और कोरोना से बचने के हर संभव तरीकों के बारे में उन्होंने जानकारी दी. जिसे लोग अमल में भी ला रहे हैं। इसके साथ ही अप्रैल माह से चमकी का प्रभाव शुरु हो गया था, पर उनकी तैयारी इसे लेकर फरवरी माह से ही थीं. पूर्व की तैयारियों एवं लोगों को निरंतर चमकी बुखार पर जागरूक करने का ही नतीजा था कि इस वर्ष उनके पोषण क्षेत्र से एक भी बच्चा चमकी से प्रभावित नहीं हुआ है।

पोषण क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य का महत्व बताया:
सोने ने बताया जब वह 2008 में आंगनबाड़ी सेविका के रुप में आयी। उस समय यहां हालात बहुत बदतर थे। कोई अपने बच्चे को पोलियो की खुराक भी नहीं दिलाना चाहता था। वहीं अधिकतर महिलाओं को अपना नाम भी लिखना नहीं आता था। उन्होंने बहुत सारी महिलाओं को उनका नाम लिखना सिखाया। अब वह सभी हस्ताक्षर करती हैं। धीरे -धीरे जब आंगनबाड़ी घर में बदलाव देख लोग भी यहां से जुड़ते गये। जब उनके बच्चे घर जाकर कविता और पहाड़े सुनाते तो उन्हें भी अच्छा लगता। गांव के लोगों को यह भी लगा कि एक छत के नीचे बच्चों को पोषण,शिक्षा और शिष्टाचार मिल रहा हैं, तो क्या बुराई है। इस पक्ष के कारण भी अपने बच्चों को लोग यहां लेकर आते हैं।