आशा देवी से सीखिए आपदा को अवसर में बदलने का हुनर

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जिला संवाददाता की रिपोर्ट.

• तुरकौलिया की आशा देवी कभी खेतों में करती थीं मजदूरी, आज मास्क बनाकर हैं खुशहाल
• जीविका की कम्युनिटी मोबिलाइजर के रूप में अन्य महिलाओं को भी बना रहीं आत्मनिर्भर

मोतिहारी। 21 जुलाई:

कुछ लोग आपदा की घड़ी में हिम्मत हार बैठते हैं एवं आपदा को अवसर में तब्दील करने से चूक जाते हैं. लेकिन जीविका की कम्युनिटी मोबिलाइजर आशा देवी ने इस मिथक जो थोड़ कर समाज को एक मजबूत संदेश देने का कार्य कर रही है. कोरोना संकटकाल में मास्क निर्माण की सोच के साथ आशा देवी ने न सिर्फ अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया बल्कि समूह की अन्य महिलाओं को भी अपने पैरों पर खड़ा होने के काबिल बनाया. आज आशा देवी अपने गाँव के महिलाओं को प्रेरित कर रहे हैं.

संघर्ष से संवारी जिन्दगी :

तुरकौलिया प्रखंड की बेलवाराय पंचायत में एक गांव है-बेलघटी। यहां के खेतों में आशा देवी कभी मजदूरी करती थी। पति रमेश गिरि परदेस में मेहनत-मजदूरी करते थे। किसी तरह से दो वक्त की रोटी की व्यवस्था हो पाती थी. छह साल पहले आशा देवी जीविका समूह से जुड़ गईं। इसके बाद घर की हालत कुछ बेहतर हुई। साल भर पहले पति जब बीमार पड़े तो उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। एक तरफ पति की दवाई की चिंता तो दूसरी तरफ घर संभालने की जिम्मेवारी। आशा देवी ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी। इसी बीच कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन ने उन्हें विचलित कर दिया। घर चलाना बड़ा मुश्किल हो रहा था। आशा देवी ने महामारी के इस दौर में मास्क की बढ़ती मांग को भांप पर मास्क बनाने की सोची. उन्होंने घर में रखी सिलाई मशीन की सहायता से मास्क निर्माण शुरू किया. पहले दिन 15 मास्क ही बना पाईं कि मशीन खराब हो गई। मुसीबतें झेलने का आदी हो चुकीं आशा देवी ने किसी तरह मशीन ठीक करवाई और दोगुने उत्साह से अपने काम में जुट गईं। मास्क की बिक्री शुरू हुयी एवं इससे आमदनी भी बढ़ने लगी.

प्रशिक्षण पाकर खुद भी निखरी, दूसरों को भी निखारा :

जीविका के तुरकौलिया बीपीएम सुभाष कुमार बताते हैं आशा देवी को कार्यालय की ओर से प्रशिक्षण दिया गया। मांग के अनुरूप उन्हें मास्क निर्माण के आर्डर भी दिए गए. आशा देवी ने 3500 से अधिक मास्क बनाए। पार्वती जीविका महिला ग्राम संगठन के तहत आशा देवी 10 से अधिक समूहों का नेतृत्व करती हैं। मास्क निर्माण कार्य से आज न केवल आशा देवी, बल्कि समूह की अन्य महिलाएं आत्मनिर्भर हुई हैं। वह लोगों को मास्क पहन कर बाहर निकलने के लिए प्रेरित भी करती हैं। आपदा को अवसर में बदल कर समूह की महिलाओं ने पहले से अपनी स्थिति बेहतर की है।

मुश्किल की इस घड़ी में सतर्कता जरुरी:

आशा देवी बताती हैं कोरोना संक्रमण ने सभी के लिए चुनौतियाँ समान रूप से खड़ी की है. इसलिए यह जरुरी है कि सभी लोग अपने स्तर पर इस महामारी के खिलाफ़ अपनी लड़ाई जारी रखें. कोरोना की रोकथाम के लिए मास्क का इस्तेमाल एवं लोगों से शारीरिक दूरी बनाए रखना इसकी रोकथाम में सबसे महत्वपूर्ण है. यदि सब साथ मिलकर इस महामारी के खिलाफ खड़े होंगे तो हम इस लडाई पर विजय पा सकेंगे.