कोरोना पर आस्था भारी, मंदिरों में जुटी महिला श्रद्धालुओं की भीड़.

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वैशाली जिला संवाददाता कौशल किशोर सिंह की रिपोर्ट.
वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण के खौफ पर शिव की आराधना भारी पड़ी. वैशाली जिले के तमाम बड़े बड़े मंदिरों के पट बंद होने के बावजूद सावन की तीसरी सोमवारी पर ग्रामीण क्षेत्र के मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. सावन के तीसरी सोमवारी के साथ-साथ सोमवती अमावस्या पड़ने के कारण सुहागिन महिलाओं ने भी निर्जला उपवास रखकर अपने सुहाग की रक्षा के लिए व्रत रखा. जगह-जगह पर महिलाओं ने पीपल के वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना की. सावन की तीसरी सोमवारी के मौके पर ग्रामीण क्षेत्र के कई शिवालयों में लड़कियां एवं महिलाएं कोरोना जैसी भयानक महामारी की परवाह किए बगैर भगवान शिव की आराधना करने मंदिर पहुंच गई. हालांकि मंदिर के पुजारी  मोहन बाबा ने शिव भक्तों को सोशल डिस्टेंसिंग के तहत मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दे रखी थी. जानकारी के अनुसार सावन माह में सोमवार को पड़ने वाली श्रावणी अमावस्या को बड़ा ही शुभ दिन माना जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखकर पीपल के वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना करती है. पूजा कर रही सुहागिन महिला सीता देवी, सविता कुमारी, किरण देवी, मधुमाला देवी, सुधा देवी, रूबी देवी, ममता कुमारी, पुजा कुमारी, पुनम कुमारी, आरती कुमारी, गुँजा देवी, प्रियंका देवी, शोभा देवी, चंद्रकला देवी आदि ने पूछने पर बताया कि खासकर सावन माह में सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन भगवान शिव की जो महिलाएं व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती है. उसकी भगवान शिव हर मनोकामना पूरी करते हैं. शिव शक्ति धाम, मनोकामना सिद्धि मंदिर फतहपुुुर मठ के पुजारी मोहन बाबा के अनुसार श्रावण मास की सोमवती अमावस्या को सुहागिन महिलाएं अपने पति एवं पुत्र के दीर्घायु होने के लिए पीपल वृक्ष के चारों ओर 108 बार दान करने वाली वस्तु या कोई फल लेकर परिक्रमा कर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की कथा सुनती है, जिससे व्रती महिलाओं की मनोकामना पूर्ण होती है.