लोगों की धमकियां भी नहीं रोक पायी सारिका को कोरोना पर जागरुक करने से

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जिला संवाददाता कौशल किशोर सिंह की रिपोर्ट

– गृह भ्रमण के दौरान लोगों की भ्रांतियों को दूर किया
– मंझौलिया स्वास्थ्य उपकेंद्र में पदास्थापित हैं एएनएम सारिका
मुजफ्फरपुर । 14 जुलाई

जब मन में काम के प्रति समर्पण हो। कुछ कर गुजरने का जज्बा हो। देश से बेइंतहा प्यार हो, तब कुछ भी कर गुजरना मुशि्कल नहीं। ऐसे की जज्बों के साथ मीनापुर प्रखंड के मंझौलिया स्वास्थ्य उपकेंद्र में कार्यरत एएनएम सारिका कोरोना से अपने क्षेत्र के लिए लड़ रही हैं। वह अपने काम के प्रति कुछ इस तरह समर्पित हैं कि असमाजिक तत्वों की धमकियां भी उनके हौसले को तोड़ नहीं सकी।

पांच महीने से लड़ रही कोरोना से लड़ाई:

एएनएम सारिका कहती हैं जब कोरोना संक्रमण का विस्तार हुआ तब से ही वह कोरोना के प्रति लोगों को सावधान कर रही हैं. लॉकडाउन के पहले भी वह आरोग्य दिवस के मौके के अलावा अनेक तरह के बैठकों में लोगों को कोरोना संक्रमण के दौरान बरतने वाली सावधानियों के बारे में बताने लगी। वहीं लॉकडाउन के दौरान जब श्रमिक बाहर से आने लगे तो हम लोगों को होम विजिट कर स्क्रीनिंग का जिम्मा मिला।

असमाजिक तत्वों से भी नहीं डरी:

स्क्रीनिंग के लिए सारिका लोगों के घरों को विजिट करती थी। 21 जून को उन्होंने 17 कोविड-19 पॉजिटिव की पहचान की. वे लोग 10 दिनों से होम क्वारंटाइन थे। जैसे ही अगले दिन उन्होंने उनमें से 5 को कोविड केयर सेंटर भेजा लोगों ने उनका विरोध करना शुरु कर दिया। कोविड केयर सेंटर से उन पांचों को कल होकर ही डिस्चार्ज कर दिया गया और होम क्वारंटाइन रहने को कहा गया। उन्होंने बताया लोगों को लग रहा था कि वह क्षेत्र का नाम बदनाम करने की कोशिश कर रहीहै. इस बात पर उन्होंने लोगों को समझाया कि उन लोगों ने पहले ही 10 दिन क्वारंटाइन में गुजार लिया है सो उन लोगों को कोई सिम्टम नहीं होने के कारण घर में ही क्वारंटाइन रहने को कहा गया है। कुछ दिनों फिर से उनकी जांच होगी। सारिका कहती हैं इसके लिए कई दिनों से उन्हें धमकियां भी मिल रही थी। प्रशासन की मध्यस्थता के कारण उनका डर कुछ कम हुआ है। अभी भी लोगों के सैंपल लेने जाती हूं। वह कहती हैं लोग उन्हें शक भरी नजरों से देखते हैं फिर भी वह अपने काम को निरंतर जारी रखी है.