एक पक्ष द्वारा जहां घर कब्जा करने को लेकर मारपीट करने व घर मे लूट पाट करने का आरोप लगा कर थाने को आवेदन दिया

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पातेपुर से रंजीत कुमार की रिपोर्ट 

 

पातेपुर के तीसीऔता थाना क्षेत्र के तीसीऔता गांव में अपनी पट्टीदारी में जमीनी विवाद को लेकर पूर्व से चली आ रही विवाद और गहरा गया है.एक पक्ष द्वारा जहां घर कब्जा करने को लेकर मारपीट करने व घर मे लूट पाट करने का आरोप लगा कर थाने को आवेदन दिया गया है वही दूसरे पक्ष का कहना है कि पूर्वजो की जमीन में उसका कानूनन अधिकार है जिसे रसूख व पैसे के बल पर हड़पने की नाकाम कोशिश की जा रही है.

 

स्थानीय लोगो के अनुसार सन 1960 से पहले अरा जिला निवासी उत्तम नारायण सिंह अपने दो नाबालिग भाई उदय नारायण सिंह एवं राजेश्वर सिंह के साथ तीसीऔता आये थे.जिन्हें तीसीऔता स्टेट के द्वारा बसने के लिए उत्तमनारायन सिंह के नाम से ही पर्चा के आधार पर जमीन दिया गया था. क्योंकि उस समय दोनो भाई नाबालिग थे. स्टेट द्वारा मिले जमीन में तीनों भाई मकान बनाकर रहते थे.समय बीतने के साथ उत्तम नारायण सिंह के दो पुत्र अरविंद सिंह एवं अरुण सिंह अपने एक चाचा राजेश्वर सिंह के बेटे अशोक सिंह, अखिलेश सिंह एवं अमरेंद्र सिंह को उक्त घर के जमीन में यह कहकर हिस्सा नही देना चाहते है कि उक्त घर समेत जमीन मेरे पिताजी के नाम से है. इसके लिए कानूनन बंटवारा के लिए राजेश्वर सिंह के दो लड़के अशोक सिंह एवं अमरेंद्र सिंह मिलकर हाजीपुर कोर्ट में अर्जी दायर कर चुके है जो विचाराधीन है.वही एक भाई उदय नारायण सिंह दिल्ली में अपना जमीन खरीदकर मकान बनाकर बस चुके है तथा राजेश्वर सिंह का एक पुत्र झंझट के चलते कहीं अलग शहर में किराए के मकान में अपना जीवन गुजर वसर कर रहे है. इस मामले में पूर्व में कई बार सामाजिक स्तर पर पंचायत भी बुलाई गई थी मगर अरविंद सिंह एवं उनका भाई अरुण सिंह पंचायत के किसी भी फैसले को मानने से इनकार कर चुका है. वही बार बार ऊँचे रसूख को लेकर अपने पट्टीदार का हिस्सा हड़पने की नीयत से पुलिस केस तथा कोर्ट में केस कर अखिलेश एवं अमरेंद्र को परेशान किया जा रहा है. इसी कड़ी में अरविंद सिंह द्वारा मकान का मरम्मत कराने के दौरान अशोक सिंह एवं अमरेंद्र सिंह द्वारा रोक लगाए जाने से आक्रोशित अरविंद सिंह द्वारा इसकी सूचना पातेपुर थाने को दी गई है. साथ ही वैशाली एस पी एवं पुलिस के वरीय पदाधिकारी को भी दिया गया है.इससे पूर्व महुआ अनुमंडल पदाधिकारी के यहां दिए गए आवेदन में अनुमंडलाधिकारी द्वारा अशोक सिंह के तरफ से कोई कागजात नही पेश करने का हवाला देते हुए अवैध रूप से घर का मरम्मत कराने का आदेश जारी किया गया जबकि अशोक सिंह द्वारा अनुमंडल कार्यालय को कोर्ट में दायर पेटिशन के कागजात समेत सर्वे के समय का खतियान व रसीद आदि कागजात समर्पित किया गया था.जिसे कार्यालय से गायब करवाने का आरोप अशोक सिंह एवं अमरेंद्र सिंह द्वारा लगाया जा रहा है.अशोक सिंह का कहना है कि जब पट्टीदारी के बंटवारा पेटिशन कोर्ट में लंबित है तो फिर किस आधार पर अनुमंडलाधिकारी उक्त विवादित भूमि पर मकान रिपेयरिंग कराने का आदेश जारी कर दिए.इस संबंध में पुछेजाने पर थानाध्यक्ष नित्यानंद प्रसाद ने बताया कि दोनों पक्षो का मामला कोर्ट में लंबित है. जबतक मामले का निष्पादन नही हो जाता तबतक दोनो पक्षो पर निरोधात्मक कार्रवाई का मामला दर्ज कर नजर रखी जा रही है ताकि कोई खून खराबा नही हो सके.