प्राइवेट अस्पताल में फ्री हुआ चमकी का ईलाज, खिल उठा पिता का चेहरा

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‌जिला संवाददाता कौशल किशोर सिंह की रिपोर्ट.

– 21 मई को 4 साल का नैतिक हुआ था एईएस से पीड़ित
– गांव के डॉक्टर ने बताया यह चमकी का है प्रभाव
– प्राइवेट अस्पताल में हुआ चमकी का मुफ्त ईलाज

मुजफ्फरपुर। 7 जुलाई

कुढ़नी प्रखंड के किसुनपुर मधुबन के अमित सिंह के बेटे नैतिक ने चमकी से जंग जीत ली है। नैतिक के घर में 21 मई की सुबह आम माहौल ही था। नैतिक को उसकी दादी खिलाने के लिए ढूंढ रही थी। इसी बीच मां ने उसके नटखटेपन से तंग आकर सुला दिया था। उसकी दादी उसे उठाकर खिलाने के गयी तो देखा कि नैतिक के मुंह से झाग निकल रहा है शरीर ऐंठ चुका है और वह बेहोश है। यह स्थिति देखते ही उसके घर में कोहराम मच गया। उनके पिता ने जल्दी से गांव के ही एक प्राइवेट डॉक्टर के पास गये। वहां डॉक्टर ने लक्षण के आधार पर ईलाज करने से मना कर केजरीवाल हॉस्पीटल ले जाने को कहा। तत्परता दिखाते हुए नैतिक के पिता ने अपने ही वाहन से नैतिक को अस्पताल पहुंचाया।

रजिस्ट्रेशन फी भी हुई रिटर्न:

अमित कहते हैं उन्हें मालूम नहीं था कि चमकी का मुफ्त में ईलाज होता है। उन्होंने एक हजार रुपये रजिस्ट्रेशन के दिए। लेकिन अस्पताल प्रशासन की इसकी जानकारी मिलते ही रजिस्ट्रेशन का पैसा अमित को वापस दिलाया गया। अमित ने बताया साफ -सुथरा बेड, अत्याधुनिक सुविधाएं एवं अनुभवी डॉक्टर की देखरेख में उनके बेटे का ईलाज हुआ। इस दौरान उनका एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ।

दो दिन बाद नैतिक ने खोली आंखे:
जब ईलाज शुरु हुआ तो सबसे पहले इसका ग्लूकोज लेवल नापा गया, फिर पानी की बोतलें चढ़ने लगा। दवाई लगने लगी तब कहीं जाकर देा दिन बाद नैतिक ने अपनी आंख खोली। पूरे ईलाज के दौरान इसके मां इसके बेड के आस-पास ही रही। अमित बताते हैं आंख खोलने पर पूरे परिवार को जो खुशी हुई वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। कुल 4 दिनों के बाद नैतिक को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

आरबीएसके के डॉक्टरों ने किया फॉलोअप:

अमित ने बताया जब नैतिक केजरीवाल अस्पताल से लौट कर आया तो उसके स्वास्थ्य की जांच के लिए घर पर आरबीएसके के डॉक्टर आते थे एवं नैतिक के स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं की जांच करते थे। साथ ही उसकी मानसिक स्थिति का भी जायजा लेते थे। अमित कहते हैं अस्पताल से ईलाज के आने के बाद उनका बेटा ज्यादा एनर्जिक महसूस करता है। अब उसके खान-पान और साफ-सफाई पर पूरा परिवार काफ़ी ध्यान देता है।

नैतिक के पिता ने अपनाया है परिवार नियोजन :

अमित कहते हैं कि उन्होंने शुरुआत में ही सोंच लिया था कि कुछ भी हो उन्हें एक बच्चा ही रखना है। जब नैतिक हुआ उसके बाद ही उन्होंने परिवार नियोजन के स्थायी साधन को अपना लिया था। नैतिक के इस बार पीड़ित होने पर सब सहम से गये थे। अब वह सदा ही उसके खान-पान और साफ-सफाई पर ध्यान रखूंगा। इस हादसे के बाद से अमित गांव के लोगों को भी चमकी के लक्षण और ससमय ईलाज के बारे में लोगों को जानकारी देते हैं।