‌‌‌स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने घर-घर पहुंचायी जागरुकता तो कम हो गया साहेबगंज में चमकी का प्रभाव

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जिला संवाददाता कौशल किशोर सिंह की रिपोर्ट

– पांच अतिप्रभावित गांवों पर दिया गया जोर
– पिछले वर्ष एईएस के आए थे 6 केस, इस वर्ष मात्र 1
– प्रभवित बच्चे का आरबीएसके के डॉक्टर कर रहे फॉलोअप
मुजफ्फरपुर। 5 जुलाई

चमकी को हराने के लिए साहेबगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने जो किया है, वह सराहणीय और अद्भुत है। वर्ष 2019 में इस प्रखंड के 6 बच्चे एईएस से प्रभावित हुए थे, पर इस वर्ष मात्र एक बच्चा ही इससे प्रभावित हो पाया। साहेबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की इस सफलता का श्रेय वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ओम प्रकाश जागरुकता को देते हैं। वह कहते हैं कि विभिन्न विभागों, स्वास्थ्यकर्मियों और जन प्रतिनिधियों की बदौलत ही यह संभव हो पाया है। वहीं जागरुकता के साथ तकनीकी पक्ष में केयर के अधिकारियों का भी अहम रोल रहा है। इसे रोकने के लिए तीन स्तर फैसिलीटी, जागरुकता, क्षमतावर्धन पर कार्य किया गया।

घर -घर जाकर जागरुकता से मिली सफलता:

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ओमप्रकाश कहते हैं कि इस बीमारी को एक ही विधि से रोका जा सकता था और वह थी जागरुकता। इसके लिए प्रखण्ड के 189 आशा, 18 ब्लॉक स्तर के अधिकारी के साथ नर्स, डॉक्टर,22 विकास मित्र सहित प्रखंड के सभी 247 वार्ड के वार्ड सदस्यों को भी प्रशिक्षित किया गया। आशा प्रतिदिन घर -घर जाकर हैंडबिल को पढ़कर सुनाती थी। जागरूकता के दौरान कुल 35000 के लगभग हैंडबिल बांटे गये थे। इसके अलावा महीने के प्रथम दिन तथा तीसरे हफ्ते के पहले दिन भी सामाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए आशाएं बैठक करती थी। आरोग्य दिवस के दिन भी माताओं को एईएस के बारे में बताया जाता था। सबसे प्रभावित पांच गांव को जिला प्रशासन की तरफ से पदाधिकारियों को गोद दिया गया। जिसके अंतर्गत प्रत्येक शनिवार को वह गोद लिए गांवों में एईएस के प्रति जागरुकता फैलाते थे। इसके अलावा सभी 26 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर दिवाल लेखन और फ्लैक्स तथा बैनर लगाए गये हैं।

प्रत्येक पंचायत में टैग किए गये हैं दो वाहन :
एईए पीड़ितों को समय पर अस्पताल लाकर उनकी जान बचायी जा सके, इसके लिए 22 पंचायतों में दो -दो टैग वाहन दे दिए गये हैं। वहीं उसके नंबर की जानकारी आशा, वार्ड सदस्य समेत जीविका और आंगनबाड़ी के कार्यकर्ताओं के पास भी उपलब्ध है। इसमें वाहन से अस्पताल पहुंचाने पर किलोमीटर के हिसाब से कम से कम 400 तथा अधिकतम 1000 रुपये दिए जा रहे हैं। वहीं दूसरे वाहन से आने पर 400 रुपये देने का प्रावधान इस बार शामिल किया गया है।

प्रत्येक 15 दिनों में नर्स को मिलता है प्रशिक्षण :
केयर के ब्लॉक मैनेजर अमलेश कुमार बताते हैं एईएस वार्ड में जिन एएनएम की ड्यूटी रहती है। उन्हें प्रत्येक 15 दिनों पर वार्ड में इस्तेमाल होने वाले उपकरण तथा दवाओं के इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षण मिलता है। जिससे एईएस से निपटने में उनका क्षमतावर्द्धन होता है।

चमकी के लिए अलग वार्ड:

केयर के ब्लॉक मैनेजर अमलेश बताते हैं साहेबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चमकी के ईलाज के लिए दो बेड के वार्ड को आरक्षित रखा गया है,जिसमें एईएस के ईलाज में प्रयुक्त होने वाले महत्वपूर्ण उपकरण तथा एसओपी के अनुसार सारी दवाईंया उपलब्ध कराई गई है। रोस्टर के अनुसार 24 घटे डॉक्टर और पारामेडिकल नर्स की ड्यूटी भी लगायी गयी है। यहां एईएस के पीड़ीत बच्चों को ईलाज होता है। बेहतर ईलाज के लिए ही यहां से किसी को रेफर किया जाता है। अभी चमकी से प्रभावित बच्चे के स्वस्थ होने के बाद से उनका दो बार फॉलो-अप भी किया गया है।वहीं आरबीएसके के डॉ लगातार उस बच्चे के स्वास्थ्य पर नज़र रखे हैं।

अतिकुपोषित बच्चों का कराया गया है सर्वे:
जिले में 1 से 15 वर्ष तक के बच्चों को शारिरिक लंबाई, कम वजनी जैसे मानकों को आधार मानकर सर्वे किया गया है ताकि कुपोषित बच्चों को पहचाना गया है। ताकि कुपोषण के स्तर में सुधार किया जा सके। वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों में नामित बच्चों के अभिभावकों के खाते में भेज दिया जाता है।