संक्रमण का भ्रम तोड़, सरकारी अस्पतालों में प्रसव पर दे रहे जोर

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जिला संवाददाता की रिपोर्टः

• कोरोना संक्रमण के दौर में भी संस्थागत प्रसव के मामले में सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा भरोसा
• आशा और एएनएम के द्वारा गर्भवती महिलाओं के लगातार फॉलोअप से दिख रहा बेहतर परिणाम

मोतिहारी। 30 जून:
कोरोना संक्रमण के दौर में भी सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव के बढ़ते आंकड़े यह बताते हैं कि सरकार का बेहतर प्रयास रंग ला रहा है। कोरोना काल में संक्रमण का खतरा हर किसी को है। ऐसे में लॉकडाउन के समय एक भ्रम की स्थिति बन गई थी कि अभी के दौर में सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव सुरक्षित होगा या नहीं।
गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग तैयार करने की जिम्मेदारी संभाल रहे केयर इंडिया के चकिया बीएम कुंदन कुमार रोशन बताते हैं कि उनलोगों ने इस भ्रम को तोड़ा है।
चकिया अनुमंडल अस्पताल के आंकड़े को उदाहरण के तौर पर लें तो लॉकडाउन के बाद अप्रैल माह में यहां मात्र 197 प्रसव हुए, जबकि प्रति माह यहां औसतन 275 से 300 प्रसव कराए जाते हैं। इसका कारण लोगों में भ्रम की स्थिति रही। कुंदन बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव को लेकर पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। कोरोना काल में तो सुरक्षा के मानकों पर रत्ती भर भी चूक की गुंजाइश नहीं है। इस बात को गर्भवती महिलाओं को समझाने में आशा, एएनएम सहित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग ला रही है। मई माह में आंकड़ा जहां 245 पर पहुंचा, वहीं जून में अब तक 256 सुरक्षित प्रसव कराए जा चुके हैं।

स्वास्थ्य विभाग की तत्परता बढ़ा रही विश्वास :

सोमवार का एक मामला है। अमानत मेंटर रंजू सिन्हा रासमंडल पिपरा गांव के वार्ड 8 की एक गर्भवती महिला का फॉलोअप कर रही थीं। देर रात गर्भवती महिला के यहां से फोन आया। प्रसव कराने के लिए एम्बुलेंस भेजा गया। उक्त गर्भवती महिला का मामला काफी गंभीर था। पीपीएच (रक्तस्राव) के कारण जोखिम ज्यादा था। एम्बुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव हुआ। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ है। गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में स्वास्थ्य विभाग तत्पर है। जिले के सदर अस्पताल समेत सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अनुमंडलीय अस्पतालों में संस्थागत प्रसव की हर सुविधा उपलब्ध है । प्रसव पूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की सेहत का लगातार फॉलोअप, गर्भावस्था के दौरान दी जाने वाली जररूरी दवाएं एवं गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग जैसे अन्य जरूरी मातृव स्वास्थ्य सेवाओं को कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पहले की तरह दी जा रही है। आशा और एएनएम गर्भवती महिलाओं का लगातार हालचाल जान रही हैं। यही वजह है कि रेस्पॉन्स बेहतर है।

गर्भवती महिलाओं को दी जा रहीं बेहतर सुविधाएं :

सरकारी अस्पतालों में प्रसव पूर्व जांच की बेहतर सुविधा उपलब्ध है। गर्भवती महिलाओं को दूसरी तिमाही से 180 आयरन की गोली, प्रसव के बाद भी 180 आयरन की गोली, 360 कैल्शियम की गोली एवं कृमि से बचाव के लिए 1 एल्बेन्डाजोल की गोली भी दी जा रही है। अस्पताल में प्रसूति को सभी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही है। गर्भवती महिलाओं को घर से अस्पताल लाने एवं उन्हें वापस घर पहुंचाने के लिए जरूरत के मुताबिक एम्बुलेंस उपलब्ध है। चकिया, मधुबन और मेहसी में 3-3 एम्बुलेंस हैं।

बेहतर देखभाल से हो रहा सुरक्षित प्रसव :

सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव के प्रति भरोसा बढ़ने का बड़ा कारण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की तत्परता है। जटिल प्रसव वाली महिलाओं को एस्टीमेटेड डेलिवरी डेट के पूर्व से अस्पताल लाकर उनकी उचित देखभाल की जाती है, जबकि सामान्य गर्भवती महिलाओं को आशा की सहायता से एएनएम द्वारा फोन पर संपर्क कर उन्हें ससमय स्वास्थ्य संस्थान पर लाकर संस्थागत प्रसव कराए कराया जा रहा है। केयर इंडिया के चकिया बीएम कुंदन कुमार रोशन बताते है कोरोना संक्रमण के बीच गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली सुविधाओं को सुनिश्चित कराने के लिए केयर इंडिया को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। केयर इंडिया के सभी प्रखंड प्रबंधकों को जिम्मेदारी दी गई है कि आशा व एएनएम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की लाइन-लिस्टिंग तैयार की जाए और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित कराई जाए। सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव से ही जच्चा-बच्चा को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए सरकार के स्तर पर इसके प्रति जागरूकता के लिए जो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, वह मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।