कालाजार पर वार के लिए लगातार हो रहा दवा का छिड़काव

0
244

जिला संवाददाता की रिपोर्टः

– कालाजार उन्मूलन को लेकर टीम वर्क पर दिया जा रहा ध्यान

-दवा का छिड़काव सहित क्षेत्र में लोगों को किया जा रहा है जागरूक

मोतिहारी। 25 जून:

कालाजार उन्मूलन को लेकर जिला मलेरिया कार्यालय मोतिहारी की प्रतिबद्धता सराहनीय है। जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ जितेंद्र प्रसाद ने बताया कि टीम वर्क के जरिये इस बीमारी के उन्मूलन पर लगातार कार्य किया जा रहा है। बरसात में मच्छरजनित बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए नियमित तौर पर दवा का छिड़काव जारी है। दवा छिड़काव साल में दो बार होता है। इसे आईआरएस (इंडोर रेसीडुअल स्प्रे) कहते हैं। बीच में भी अगर कहीं कोई कालाजार का मामला आ गया तो संक्रमित व्यक्ति के घर के 200 से 250 घरों की परिधि में दवा का छिड़काव कराया जाता है, जिसे फोकल स्प्रे कहते हैं।

लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार :

लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया जा रहा है। प्रभावित इलाकों को चिन्हित करने का पैमाना यह है कि जहां, तीन साल तक एक भी केस नहीं आये, उसको छोड़ बाकी के इलाकों में प्रखंड से लेकर पंचायत स्तर पर काम कर रहे हैं। वीबीडीएस से लेकर आशा, एएनएम कालाजार की रोकथाम को लेकर तत्पर है। कहीं भी एक भी मामला आने पर उस मुहल्ले में सघन दवा छिड़काव अभियान तेज कर दिया जाता है। लोगों में जागरूकता फैलाई जाती है।

हर पीएचसी पर मुफ्त जांच सुविधा उपलब्ध :

हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कालाजार जांच की सुविधा उपलब्ध है। डॉ जितेंद्र ने बताया कि कालाजार की किट (आरके-39) से 10 से 15 मिनट के अंदर टेस्ट हो जाता है। हर सेंटर पर कालाजार के इलाज में विशेष रूप से प्रशिक्षित एमबीबीएस डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हैं।

जिले में इलाज के लिए 4 सेंटर :

डॉ जितेंद्र ने बताया कि मोतिहारी जिले में कुल चार सेंटर हैं, जहां इलाज की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। इनमें सदर अस्पताल मोतिहारी, मधुबन, चकिया और कल्याणपुर शामिल हैं। 25 ब्लॉक में कालाजार की रोकथाम को लेकर दवा छिड़काव सहित जागरुकता कार्यक्रम चल रहा है।

रोगी को श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में मिलते हैं पैसे :
कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में पैसे भी दिए जाते हैं। बीमार को 6600 रुपए राज्य सरकार की ओर से और 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। ये राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को प्रदान की जाती है। वहीं चमड़ी से जुड़े कालाजार (पीकेडीएल) में 4 हजार की राशि केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है।

कालाजार के कारण :

कालाजार मादा फ्लेबोटोमिन सैंडफ्लाईस के काटने के कारण होता है, जोकि लीशमैनिया परजीवी का वेक्टर (या ट्रांसमीटर) है। किसी जानवर या मनुष्य को काट कर हटने के बाद भी अगर वह उस जानवर या मानव के खून से युक्त है तो अगला व्यक्ति जिसे वह काटेगा वह संक्रमित हो जायेगा। इस प्रारंभिक संक्रमण के बाद के महीनों में यह बीमारी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है, जिसे आंत में लिशमानियासिस या कालाजार कहा जाता है।

ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क :

कालाजार के लक्षणों में आम तौर पर दो हफ्ते तक बार-बार बुखार, वजन घटना, थकान, एनीमिया और लिवर व प्लीहा की सूजन शामिल हैं। समय रहते अगर उपचार किया जाए, तो रोगी ठीक हो सकता है। कालाजार के इलाज के लिए दवा आसानी से उपलब्ध होती हैं। कालाजार के बाद पोस्ट कालाजार डरमल लेशमानियासिस (पीकेडीएल; कालाजार के बाद होने वाला त्वचा संक्रमण) होने की भी संभावना होती है। इसलिए इस से भी सतर्क रहने की जरूरत है।

साफ-सफाई का रखें पूरा ख्याल :

अपने घर, गौशाला की साफ-सफाई रखें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। घर की दीवारों की दरारों को भर दें। दवा छिड़काव के बाद कम से कम तीन माह तक मकान की रंगाई-पुताई न करवाएं। दवा छिड़काव के दौरान घर के सामान को अच्छी तरह से ढक दें। रात में मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें।