कर्मठता एवं समर्पण से किया चमकी बुखार पर नियंत्रण

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जिला संवाददाता की रिपोर्टः

– सप्ताह में दो दिन करती हैं सामुदायिक बैठक
– इस वर्ष जागरुकता के कारण नहीं आया है एईएस का कोई केस

मुजफ्फरपुर/ 13जून

चमकी ने अपने पांव पसारने शुरु कर दिए हैं। इस लिहाज से इस बार स्वास्थ्य विभाग के साथ जिला प्रशासन भी पूरी तन्मयता के साथ एईएस के प्रति लोगों को जागरुक कर रहा है। इन सभी जागरुकता अभियान को सफल बनाने में जो अपनी अहम भूमिका निभाती हैं वे एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी सेविका होती हैं। यह लोगों के घरों में जाकर उन्हें जागरुक करती हैं। ऐसे ही एक स्वास्थ्य की सिपाही हैं जिले के मोतीपुर प्रखंड के नरियार प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र की एएनएम नीलम देवी। नीलम विगत 12 वर्षों से इस क्षेत्र में जागरुकता अभियान को लीड कर रही हैं। इनके अनुभव और मेहनत का नतीजा ही है कि एईएस के लिए अतिसंवेदनशील होते हुए भी इनके क्षेत्र में अभी तक कोई केस नहीं आया है। उन्होंने अपने पोषण एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में सघन जागरूकता अभियान चलाया है तथा आशा कर्मियों की मदद से समुदाय को इस महामारी से बचाव तथा नियंत्रण पर जागृत किया है।
नीलम कुमारी के टीम में 8 आशा और 11 आंगनबाड़ी सेविका हैं। नीलम कुमारी ने आशाकर्मियों के साथ घर घर जाकर चमकी बुखार से बचाव के उपाय, रोग के लक्षण, घरेलु प्राथमिक चिकित्सा तथा लक्षण नजर आने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह की जरुरत पर जागरूकता फैलाई है.।वह कहती हैं कि वे ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस पर हर बुधवार तथा शुक्रवार को टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की जांच व सलाह तथा पोषण की जानकारी के अलावा चमकी बुखार से बचाव के बारे में नियम पूर्वक जानकारी दे रहीं हैं। वह शिशुओं तथा छोटे बच्चों के पोषण की महत्ता पर माताओं तथा परिवारवालों को बताते हुए कहती हैं की सुपोषित शिशु इस रोग से सुरक्षित रहता है तथा वो शिशु स्वास्थ्य व पोषण की जरुरत पर लगातार बल देती हैं।
नीलम बताती हैं की कई माता पिता तथा परिवारवाले साधारण से ज्वर को भी चमकी बुखार समझ घबरा जाते हैं तथा आनन फानन में नीम हकीम के चक्कर में भी आ जाते हैं तथा अपने शिशुओं की जिंदगी को खतरे में डाल देते हैं। उन्होंने बताया की इन समस्याओं से निपटने हेतु वह नियमित रुप से सप्ताह में दो बार बैठक करती हैं जिसमें गांव की महिलाओं को बुला कर उनको चमकी पर जरुरी सलाह व उपचार बताती हैं। मेरे क्षेत्र को जिला प्रशासन की अधिकारी को भी जागरुकता फैलाने के लिए गोद लिया है। उसमें प्रत्येक शनिवार को चमकी पर चर्चा होती है। जिसमें उसके बारे में लोगों को विस्तार से बताया जाता है। किसी भी शिशु अथवा बच्चे में चमकी बुखार के लक्षण नजर आने पर वो तुरंत प्राथमिक उपचार करती हैं तथा स्वयं परिवारवालों के साथ शिशु को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर जाती है जहाँ जरुरी चिकित्सा उपलब्ध करायी जाती है।
शिशु पोषण की जरुरत पर बल- सामुदायिक संवाद तथा माताओं से बातचीत के दौरान लगातार शिशु पोषण के महत्त्व पर बल देती हैं। वो बताती हैं की शिशु को कुपोषण से बचाना वो अपनी प्राथमिकता समझती हैं तथा हर समय समाज के बीच जाकर लोगों को शिशु पोषण की जरुरत तथा कुपोषण से बचाव के उपायों के बारे में लोगों को जागरूक करती हैं। एएनएम नीलम के अथक प्रयासों का नतीजा है कि नरियार के लगभग 130000 की आबादी में इस बार अभी तक एईएस का एक भी केस नहीं आया है। जरुरत पड़ने पर वह खुद भी बच्चों को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच जाती हैं। वह मानती हैं कि सुरक्षा ही सबसे बड़ा उपाय है