‌‌‌चमकी को धमकी देने रवाना किये गए जागरुकता वाहन

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वैशाली जिला संवाददाता की रिपोर्टः

– कुल 410 वाहनों को किया गया रवाना
– 3 दिनों तक गांवों और टोलों मे घूम कर करेगें प्रचार
– एकजुट होकर चमकी से निपटने का डीएम ने दिया संदेश
मुजफ्फरपुर। 30 मई
सुनो और समझो और जो न समझे उसे समझाओ…हमें देना है चमकी को धमकी…. कुछ यही लाइनें दुहराते चमकी के खिलाफ जागरुकता प्रचार वाहन को पूरे जिले में भेजा गया। जिसे समाहरणालय कैंपस से शनिवार को जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह ने हरी झंडी दिखाई। चमकी को धमकी स्लोगन को जमीन पर उतारने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से कुल 410 वाहनों को गांवों और टोलों मे रवाना किया गया है। समाहरणालय कैंपस से 25 वाहनों को रवाना किया गया है। वहीं प्रत्येक प्रखंडों से कुल 385 वाहनों को उनके पंचायतों के लिए रवाना किया गया है। सभी वाहन अगले 3 दिनों तक गांव तथा टोलों मे घूम -घूम कर सघन प्रचार करेगें। वहीं इसके अतिरिक्त अन्य माध्यमों से चमकी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभिन्न् विभागों के साथ सघन जागरुकता गतिविधियों को कराया जा रहा है। जिसमें हैंड बिल , दिवार लेखन, होर्डिंग, पोस्टर तथा ऑडियो और विजुअल माध्यम हैं।
प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाते हुए जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि चमकी जिले के लिए बड़ी चुनौती है। जिसके लिए पहले से भी तैयारी और जागरुकता फैलायी जा रही है। चमकी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए हमलोग दो स्तर पर काम कर रहे हैं। पहला इलाज की मुकम्मल व्यवस्था हो जिसके लिए हमारे सभी पीएचसी, मेडिकल कॉलेज, अस्पताल में अलग से वार्ड, दवा और डॉक्टर की पूरी व्यवस्था है। दूसरी पहल है कि लोगों में यह जागरुकता हो कि लक्षण पाए जाने पर वे जल्द से जल्द अस्पताल लाएं। वहीं बच्चों को भीषण गर्मी से भी बचाना होगा। इसके लिए ही प्रचार वाहनों को रवाना किया गया है ताकि लोगों का इस तरफ ध्यान जाएं और वे इस बारे में जागरूक भी हों। चमकी को हराने के लिए हमें एकजुट होकर काम करना होगा।

चमकी के लक्षण

1. मिर्गी जैसे झटके आना (जिसकी वजह से ही इसका नाम चमकी बुखार पड़ा)
2. बेहोशी आना
3. सिर में लगातार हल्का या तेज दर्द
4. अचानक बुखार आना
5. पूरे शरीर में दर्द होना
6. जी मिचलाना और उल्टी होना
7. बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस होना और नींद आना
8. दिमाग का ठीक से काम न करना और उल्टी-सीधी बातें करना
9. पीठ में तेज दर्द और कमजोरी
10. चलने में परेशानी होना या लकवा जैसे लक्षणों का प्रकट होना।

ऐसे करें बचाव
1. बच्चों को रात में अच्छी तरह से खाना खिलाकर सुलाएं। खाना पौष्टिक होना चाहिए।
2. बच्चों को खाली पेट लीची न खाने दें। अधपकी लीची का सेवन कदापि न करने दें।