बर्षा होने से मक्का के हरियाली ने किसानों का दिल बाग-बाग कर दिया हैं.

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वैशाली जिला  की रिपोर्टः

वैशाली जिले में विगत माह से देश में जारी लॉक डाउन से रोजमर्रा की जिंदगी भले ही प्रभावित हो गया है. इस बीच पिछले महीने से ही एक-दो दिनो से होने वाली बारिश किसानों की खुशी लौटा दी है.
बताते चलें कि गोरौल प्रखंड क्षेत्र के किसानों ने अपनी खेतों में नगदी फसल तंबाकू के साथ मक्का आदि की फसल भी उगा लेते हैं. जिससे उनकी आजीविका चलती रहती है. लॉक डाउन के बीच अप्रैल, मई माह में ऐसी बर्षात सायद ही सावन, भादो की याद दिला जाती है. अभी जहां प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ती थी. वही आज लोग घरों में रात चादर ओढ़कर सोते हैं. यह बे मौसम बर्षात की बेरहमी कहे या फिर किसानों के लिए अच्छी वरदान. यह विरोधा भास जरूर है. परंतु इस माह में जहां फसलें, भिषण गर्मी व जलती धुप के थपेड़ो से पेड़, पौधें झूलसती नजर आती थी. वहीं आज खेतों में लगी पेड़ , पौधों एवं मक्का की फसलों को देखने से आज ऐसा प्रतित होता है कि प्रकृति शायद किसानों पर काफी मेहरबान हैं. जदयू प्रदेश संगठण प्रभारी बोचहाँ विधानसभा सह वैशाली नेता पंकज पटेल, गोरौल प्रखंड उप प्रमुख संजय कुमार सिंह, पुर्व पंचायत समिति सदस्य बंगाली प्रसाद सिंह, धीरेन्द्र कुमार धीरज, नागेंद्र प्रसाद, अनिल कुमार, रामचन्द्र सिंह, बिनोद सिंह, अशोक सिंह, गणेश प्रसाद, मंटु कुमार, मनीष कुमार, धीरज कुमार, सत्यनारायण सिंह, सतीश श्रीवास्तव, आदि सहित लोगों से मिली जानकारी के अनुसार गोरौल प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न जगहों पर किसानों को अपनी मक्का दे लहलहाती फसलों को देखकर दिल बाग-बाग हो गया है. जो मकई के पौधे की हरियाली ने शायद लॉक डाउन की चिंता से उन्हें उवार दिया है. गांव के पिरोई, इसमाईलपूर, मंजिया, बकसामा, पोझा, रसुलपुर कोरी गांव, छितरौली, तुर्की, बाँदे, सोन्धों, बड़ेवा, गोरौल, कटरमाला आदि जगहों पर के लोग बताते हैं कि पहले इस माह में मकई की फसल में सिंचाई करने के लिए किसान थक जाते थे. जो कि मक्का के फसलों में दो-तीन दिनों पर ही पानी पटवन किया जाता था. लेकिन यह पहला मौका है. जब ऐसी खुशी उन्हें मिल रही है. बताते चलें कि सड़कों पर उड़ती धूल उमस भरी गर्मी और लू के थपेड़ों के साथ बहुत ही तेज पछुआ हवा से लोग बेहाल हो जाते थे. परंतु प्रकृति का यह बदला मिजाज आज लोगों में खासकर क्षेत्र के किसानों को सुकून जरूर दे रहा है. भले ही बेमौसम बरसात हो फिलवक्त किसान खुश दिख रहे हैं. लॉक डाउन में जरूरत की चीजें सहूलियत से ना मिलना. उन्हें यह साल जरूर जाना हो पर मकई की फसल उन्हें धान्य वाद देनी प्रतीत होती है. उन्हें लगता है कि भविष्य में संभावित आने वाले संकट के समय में उन्हें यह वरदान साबित हो गया है.